पश्मीना शॉल अपनी बेजोड़ गर्माहट, हल्के वजन और राजसी लुक के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यह शॉल लद्दाख के ठंडे पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली ‘चांगथंगी’ बकरी के बालों (कैशमीयर) से हाथ से तैयार की जाती है। क्योंकि यह बेहद कीमती और दुर्लभ होती है, इसलिए बाजार में नकली या मिलावटी पश्मीना शॉल भी खूब बेची जाती हैं।
how to identify if the pashmina shawl i am buying is genuine?
Important Topic
अगर आप अपने लिए एक असली और शुद्ध पश्मीना शॉल खरीदने जा रहे हैं, (how to identify if the pashmina shawl i am buying is genuine?) तो धोखाधड़ी से बचने के लिए इन 6 आसान तरीकों से उसकी शुद्धता की जांच जरूर करें।


1. असमान बुनावट (Uneven Weave) की जांच करें
असली पश्मीना शॉल को लद्दाख और कश्मीर के कारीगर पारंपरिक करघों (Handlooms) पर हाथ से बुनते हैं। हाथ की बुनावट कभी भी मशीन की तरह एकदम परफेक्ट या एक जैसी नहीं हो सकती। अगर आप शॉल को रोशनी के सामने फैलाकर देखेंगे, तो आपको उसकी बुनावट में कहीं छोटा-बड़ा गैप या हल्की सी असमानता दिखाई देगी। अगर बुनावट हर जगह से एकदम एक समान और परफेक्ट है, तो समझ जाएं कि वह मशीन से बनी नकली शॉल है।
2. ‘बर्न टेस्ट’ (Burn Test) सबसे भरोसेमंद तरीका
शुद्धता जांचने का यह सबसे पक्का तरीका है। शॉल के कोने से एक छोटा सा धागा या फ्रिंज (झालर) का हिस्सा निकालें और उसे सुरक्षित रूप से माचिस से जलाएं।
- असली पश्मीना: जलने पर इससे इंसानी बालों या पंखों के जलने जैसी गंध आएगी और बची हुई राख बिल्कुल बारीक, भूरे रंग की होगी जिसे छूने पर वह पाउडर बन जाएगी।
- नकली पश्मीना: अगर धागा जलने पर प्लास्टिक जैसी महक आए, वह सिकुड़ जाए या उसकी सख्त गांठ बन जाए, तो उसमें सिंथेटिक या एक्रेलिक मिला हुआ है।
3. चमक और बनावट (Sheen and Texture) देखें
असली पश्मीना शॉल दिखने में बहुत ज्यादा चमकदार नहीं होती। इसमें एक बहुत ही हल्की, प्राकृतिक और सुस्त (Matte) चमक होती है। अगर शॉल धूप या रोशनी में बहुत ज्यादा चमक रही है, तो उसमें सिल्क (रेशम) या नायलॉन की मिलावट हो सकती है। इसके अलावा, असली पश्मीना छूने पर बेहद मुलायम और मखमली अहसास देती है।
4. रिंग टेस्ट (The Ring Test)
यह पश्मीना की शुद्धता जांचने का एक पुराना और मशहूर तरीका है। एक शुद्ध और असली पश्मीना शॉल इतनी पतली और मुलायम होती है कि वह एक छोटी सी उंगली की अंगूठी (Ring) के बीच में से आसानी से पार हो सकती है। हालांकि, आजकल कुछ बारीक मशीन-मेड सिंथेटिक शॉल भी इस टेस्ट को पास कर लेती हैं, इसलिए इस टेस्ट के साथ-साथ बाकी तरीकों को भी आजमाएं।
5. कोई स्टेटिक बिजली (Static Electricity) नहीं बनती
चूंकि पश्मीना एक प्राकृतिक पशु फाइबर (Animal Fiber) है, इसलिए इसमें स्टेटिक बिजली नहीं बनती है। अगर आप शॉल को अपने बालों या किसी सिंथेटिक कपड़े पर रगड़ते हैं और उसमें से ‘चट-चट’ की आवाज आती है या वह आपके शरीर के बालों को आकर्षित करती है, तो वह असली पश्मीना नहीं है। वह पूरी तरह से एक्रेलिक या पॉलिएस्टर है।
6. जीआई टैग (GI Tag) को प्राथमिकता दें
भारत सरकार असली कश्मीरी पश्मीना को बढ़ावा देने के लिए ‘जीआई टैग’ (Geographical Indication) प्रमाणित करती है। असली पश्मीना शॉल पर एक विशेष रबर स्टैम्प या लेबल होता है, जिसे माइक्रोस्कोप के नीचे देखने पर एक यूनिक कोड दिखाई देता है। खरीदारी करते समय हमेशा दुकानदार से जीआई सर्टिफाइड पश्मीना की मांग करें।
निष्कर्ष
पश्मीना केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि एक कला है जिसे बनने में महीनों का समय लगता है। इसलिए असली पश्मीना शॉल कभी भी बहुत सस्ती नहीं मिलती। यदि कोई आपको बहुत कम दाम में पश्मीना देने का दावा कर रहा है, तो सावधान हो जाएं। हमेशा विश्वसनीय और प्रमाणित डीलर्स से ही खरीदारी करें ताकि आपकी मेहनत की कमाई सही जगह लगे।

